JIM Alumni Association
Jaipuria Institute of Management

रचनात्मकता, ज्ञान और भविष्य की दृष्टि के साथ मनाया गया हिंदी दिवस

September 17, 2026
Anurag Mohan
रचनात्मकता, ज्ञान और भविष्य की दृष्टि के साथ मनाया गया हिंदी दिवस

जयपुरिया प्रबंधन संस्थान, लखनऊ में 14 सितंबर 2026 को हिंदी पखवाड़े के माध्यम से हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। इस वर्ष का आयोजन “पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक” विषय पर केंद्रित रहा। इस आयोजन ने हिंदी की समृद्ध विरासत को वर्तमान समय में इसकी निरंतर विकसित होती प्रासंगिकता के साथ जोड़ने का सार्थक प्रयास किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन समारोह के साथ हुआ, जिसमें डॉ. हेमेंद्र गुप्ता, डीन – एकेडमिक्स, डॉ. रश्मि चौधरी, डीन – स्टूडेंट अफेयर्स, सहित संस्थान के संकाय एवं स्टाफ सदस्यों ने सहभागिता की।

इस कार्यक्रम का आयोजन पुस्तकालय टीम द्वारा डॉ. बद्री विशाल शुक्ला, हेड लाइब्रेरियन के नेतृत्व में किया गया। श्री चंदन मिश्रा, सुश्री जिमी यादव एवं श्री अरुण गोंड ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण एवं सराहनीय सहयोग प्रदान किया। टीम के समन्वित प्रयासों से हिंदी पखवाड़े का आयोजन सुचारु एवं प्रभावी रूप से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के अंतर्गत कविता पाठ, भाषण एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों एवं स्टाफ को हिंदी के प्रति अपनी रचनात्मकता, ज्ञान और अभिरुचि प्रदर्शित करने का अवसर मिला। जयपुरिया समुदाय के सभी वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन में विशेष ऊर्जा और जीवंतता का संचार किया।

प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन डॉ. मनीषा सेठ, चेयरपर्सन – लाइब्रेरी एवं एआरसी; श्री अनुराग मोहन, सीनियर मैनेजर – एआरसी; तथा डॉ. अनुभव मिश्रा, फैकल्टी – मार्केटिंग द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेताओं, श्री दीपक कुमार, सुश्री आयुषी सिंह एवं श्री अक्षय कुमार, को सम्मानित किया गया। उनकी उत्साहपूर्ण सहभागिता और ज्ञान को प्रोत्साहित करते हुए यह आयोजन हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और बदलते डिजिटल एवं प्रौद्योगिकी-प्रधान युग में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

संकाय, स्टाफ एवं विद्यार्थियों की उत्साहजनक भागीदारी ने इस आयोजन को सफल बनाने के साथ-साथ अगले वर्ष के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार किया है। इस वर्ष के अनुभव से सीख लेते हुए, जयपुरिया लखनऊ में हिंदी पखवाड़े का आगामी आयोजन और अधिक विस्तृत, विविधतापूर्ण एवं प्रभावशाली बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक, हिंदी निरंतर विकसित हो रही है, संवाद स्थापित कर रही है और नई संभावनाओं का सृजन कर रही है।

 

लेख: अनुराग मोहन द्वारा

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